श्री गणेश को सुमिर के, शारद शीश नवाय ।
गौ मां की महिमा कहूं, कंठ विराजो आय ।।
मंदमती मैं मात गौ, मुझको तनिक न ज्ञान ।
कृपा करो हे नंदिनी, महिमा करूं बखान ।।
जय जय जय जय जय गौ माता,
कामधेनु सुख शांति प्रदाता ।।
मात सुरभि हो जग कल्यानी, ऋषि मुनियों ने कथा बखानी ।।
तुम ही हो हम सबकी मइया, भवसागर की पार लगइया ।।
देवन आई विपत करारी, तुमने माता की रखवारी ।।
ऋषि मुनियन पर दानव धावा, सब मिल तुमहिं पुकार लगावा ।।
व्याकुल होकर गंगा माई, आकर पास गुहार लगाई ।।
गंगा को मां दिया निवासा, आपहिं लक्ष्मी आई पासा ।।
लक्ष्मी को भी तुम अपनाई, सबके जीवन मात बचाई ।।
तैतीस कोटि देव–मुनि आये, सबही माता आप बचाए।।
तुमने सबकी रक्षा कीन्हीं, असुर ग्रास हर जीवन दीन्ही।।
माता तुम हो दिव्य स्वरूपा, तव महिमा सब गाये भूपा।।
देव दनुज मिल मथे नदीशा, पाये चैदह रतन मनीषा।।
सागर को मिल देव मथाये, कामधेनु रत्नहिं तब पाये।।
कामधेनु के पांच प्रकारा, सेवा से जाये भव पारा।।
सुभद्रा नंदा सुरभि सुशीला, बहुला धेनु काम की लीला।।
जो जन सिर गोधूलि लगाये, ताके पाप आप कट जाये।।
गो चरण मा तीर्थ निवासा, गौ भक्ति सम नहीं उपवासा।।
गौ सेवा है मोख की सीढी, धन बल यश पावहिं सब पीढ़ी।।
विद्या लक्ष्मी आवहिं पासा, कामधेनु कर जहां निवासा।।
भोलेनाथ श्राप जब पाये, सीधे वह गो लोक सिधाये।।
शिव करन सुरभि की स्तुति लागे, परिक्रमा कर मां के आगे।।
हांथ जोड़ शिव बात बताई, तपती देह श्राप से माई।।
तोरी शरण मात मैं आया, शीतल कर दो मेरी काया।।
सुरभि देह में प्रविशे शंकर, जग कोलाहल मचा भयंकर।।
तब सबहिं देव मिल स्तुति गाये, पता पाय गोलोक सिधाये।।
सूर्य समान सुरभि सुत देखा, नील नाम था तेज विशेषा।।
गो सेवक थे कृष्ण मुरारी, जिनकी महिमा सबसे न्यारी।।
कान्हा वर में गाय चराते, दूध दही पी माखन खाते।।
जबहिं कृष्ण बांसुरी बजाये, बछड़े गाय लौट आ जाये।।
जिस घर हो मां तेरा वासा, दुःख पीड़ा किम आवहिं पासा।।
जो जहं कामधेनु की पूजा, पुण्य नहीं इससे बड़ दूजा।।
माता तुमने ऋषि मुनि तारे, देव मनुज के भाग्य संवारे।।
वेद पुराणों में तव गाथा, युगो–युगों से है तव साथा ।।
तुमहिं मनुज के भाग्य संवारे, अंत काल वैतरिणी तारे।।
तव महिमा किम गाऊं माते, तुममे चारो धाम समाते।।
पंचगव्य की महिमा न्यारी, तुमसे ही है दुनिया सारी ।।
प्रातःकाल जो दर्शन पाये, बिगड़े काज आप बन जाये।।
हाथ जोड़ जो शीश नवाये, बुरी बला से मात बचाये।।
जो जन गौ चालीसा गाये, सुख–सम्पति ताके घर आये।।
चेतन है मां तेरा दासा, मात हृदय में करो निवासा ।।
गौ चालीसा जो पढ़े, नित्य नियम उठ प्रात ।
ज्ञान संग धन यथ बढ़े, कष्ट हरे गौ मात ।।
गौ वंदन जो कर लिए, पूरण चारो धाम ।
तरणि तीर कान्हा मिले, पाये सरयू राम ।।